जेल में बंदी की मौत, परिजनों का आरोप- पुलिस ने टॉर्चर किया, जांघ से मांस उतरकर हड्‌डी तक दिख रही थी, पुलिस का तर्क- कोई चोट नहीं थी

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जगाधरी जेल में 5 माह बाद एक और बंदी की मौत हो गई। लेकिन इस बार आरोप जेल प्रशासन पर नहीं बल्कि जिला पुलिस पर लगे हैं। बाइक चोरी के आरोप में यूपी निवासी 23 साल के हिमांशु को गिरफ्तार किया था। मृतक के ताऊ ईश्वर सिंह का आरोप है कि पुलिस ने टॉर्चर किया। मौत की वजह यही हो सकती है, इसलिए इसकी जांच की जाए। हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके भतीजे को छोड़ने के नाम पर पैसे की डिमांड की गई।

शुक्रवार सुबह हिमांशु की मौत की सूचना उनके पास फोन से आई। जब वे यमुनानगर पहुंचे तो दो घंटे बाद शव मोर्चरी में होने की बात पता चली। उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने रोष भी प्रकट किया। वहीं मामले में मजिस्ट्रेट जांच शुरू हो गई है। मजिस्ट्रेट की देखरेख में पोस्टमार्टम हुआ। वहीं इस दौरान मोर्चरी के बाहर सुबह से ही पुलिस बल तैनात था। प्रशासन को डर था कि कहीं कोई विवाद न हो जाए। मृतक को पहले करनाल जेल भेजा गया था। वहां पर उसकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने पर एक दिन पहले ही जगाधरी जेल में शिफ्ट किया गया था। उधर, पुलिस अधिकारियों ने मृतक के परिजनों द्वारा लगाया गया आरोपों को निराधार बताया। वहीं 5 माह में जेल में दो की मौत होने से वहां के मेडिकल सिस्टम पर भी सवाल उठ रहे हैं।

हिमांशु की मौत के बाद पिता को नहीं बताया| हिमांशु का शव लेने पहुंचे उनके रिश्तेदारों ने बताया कि हिमांशु अपनी बहन का अकेला भाई था। वह पढ़ाई छोड़कर खेती करता था। हिमांशु की मौत का जैसे ही पता चला तो उसके पिता को कुछ नहीं बताया गया क्योंकि वह बीमार रहते हैं। जवान बेटे की मौत का वह दुख नहीं सहन कर पाएंगे। ईश्वर ने बताया कि उसके भतीजे को बाइक चोरी के आरोप में पकड़ा था। साल 2019 के सिटी यमुनानगर थाना एरिया के एक केस में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनका कहना है कि जेल भेजने के बाद पुलिस ने यहां तक नहीं बताया कि उसे कौन सी जेल में भेजा गया।

16 काे करनाल से यहां शिफ्ट किया था

जेल अधीक्षक संजीव पातड़ ने बताया कि कोरोना को देखते हुए अपराधिक मामलों में गिरफ्तार आरोपियों को करनाल जेल में भेजा जाता है। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें यहां पर शिफ्ट किया जाता है। हिमांशु को 16 सितंबर को ही करनाल जेल से जगाधरी जेल में शिफ्ट किया गया। 17 सितंबर रात को उसने पेट में दर्द होने की शिकायत की। मेडिकल ऑफिसर ने तुरंत उसे ट्रीटमेंट दिया और सिविल अस्पताल रेफर कर दिया। वहां पर उसकी मौत हो गई।

शरीर पर लगी चोटें पुलिस की बर्बरता दर्शा रही: परिजन

मृतक के परिजनों का कहना है कि हिमांशु के शरीर पर लगी चोटे पुलिस की बर्बरता को बता रही थी। उसके पेट से लेकर जांघ की चमड़ी तक उतरी हुई थी। जांघ में मांस उतरकर हड्डी तक नजर आ रही थी। मजिस्ट्रेट ने इन सभी को अपनी रिपोर्ट में नोट भी किया है।

मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही साफ होगा

स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट के इंचार्ज जोगिंदर सिंह ने बताया कि हिमांशु को बाइक चोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस पर पहले भी केस दर्ज हैं। पूछताछ के दौरान किसी तरह का टॉर्चर नहीं किया गया। कोर्ट में पेश करने और न्यायिक हिरासत में भेजने से पहले आरोपी का मेडिकल कराया गया था। उसमें किसी भी तरह की चोट की बात सामने नहीं आई थी। मौत का कारण क्या है यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही साफ होगा। पुलिस ने ईमानदारी से अपनी कार्रवाई की थी। जहां तक पैसे मांगने की बात है वह भी पूरी तरह से झूठ है।

रमन मौत मामला, परिवार मजिस्ट्रेट जांच पर उठा चुका सवाल, सीबीआई जांच की मांग को लेकर देशभर से जुटे थे पंचायत में लोग

होली के दिन भाटिया नगर में दो पक्षों में मारपीट हुई। चुन्ना भट्टी के रमन पक्ष पर आरोप लगा कि उन्होंने दूसरे पक्ष पर फायरिंग की और दो को गोली लगी। पुलिस ने रमन समेत उसके साथियों पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया था। दूसरे पक्ष पर भी मारपीट का केस दर्ज था। रमन ने 21 अप्रैल को थाने में सरेंडर कर दिया था। अगले दिन उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जेल में जाने के बाद उसकी तबीयत खराब हो गई थी। 3 दिन बाद दोपहर का खाना खाने के बाद उसे उल्टी लगी और वह वहीं गिर गया। उसे जेल से एंबुलेंस में सिविल अस्पताल यमुनानगर लाया गया। यहां उसकी मौत हो गई। रमन के पिता राजेंद्र वाल्मीकि ने आरोप लगाया कि बेटे को जेल में जहर दिया गया। इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच की गई लेकिन 5 माह बाद भी पता नहीं चला। गत दिनों देशभर से दलित समाज के लोग महापंचायत में जुटे थे। उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की थी।